Feed on
Posts
Comments

Archive for April, 2008

तेरे क़रीब आके बडी उलझनों में हूं
मैं दुश्मनों में हूं कि तेरे दोस्तों में हूं ।
मुझसे गुरेज़-पा है तो हर रास्ता बदल
मैं संगे-राह हूं तो सभी रास्तों में हूं ।
तू आ चुका है सतह पे कब से ख़बर नहीं
बेदर्द मैं अभी उन्हीं गहराइयों में हूं ।
ऐ यारे ख़ुश-दयार तुझे क्या ख़बर कि मैं
कब से उदासियों [...]

Read Full Post »