अहमद फ़राज़
Posted in बज़्मे उर्दू on April 4, 2008 | 1 Comment »
तेरे क़रीब आके बडी उलझनों में हूं
मैं दुश्मनों में हूं कि तेरे दोस्तों में हूं ।
मुझसे गुरेज़-पा है तो हर रास्ता बदल
मैं संगे-राह हूं तो सभी रास्तों में हूं ।
तू आ चुका है सतह पे कब से ख़बर नहीं
बेदर्द मैं अभी उन्हीं गहराइयों में हूं ।
ऐ यारे ख़ुश-दयार तुझे क्या ख़बर कि मैं
कब से उदासियों [...]